अदा-ऐ-हुस्न…

अदा-ऐ-हुस्न उनका क्या कहे…पैर ज़मीन पर पड़े तोह शोर इस सीने में होता है, अंदाज़ देखकर उनका गुरूर इस दिल में होता है…खुशफहमी कहे या आरज़ू…सोचते है, असर हमारा भी उनपर कुछ ऐसा ही होता है…@};-

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खूबसूरत सादगी…

सादगी है खूबसूरती में उसके, खूबसूरती में सादगी भी…
ठैहराव है धरती का और उड़ान आसमान की…
अदायें तेज़ तलवार जैसी, आवाज़ मखमली सुहानी…
सादगी है खूबसूरती में उसके, खूबसूरती में सादगी भी …@};-